बुधवार, 27 अक्तूबर 2010

फत्ते का चौथा

फत्तू की करवाचौथ तो आपने देख ली मो सम कौन पर अब समय है फत्ते का चौथा देखने की। देखते हैं भाई कित हान्डै सै:

साल भर इतराकर
नाकों चने चबवाकर
फत्ते की घराळी ने
चौथे के दिन छूकर
पंजे धोक लगाई
आशीर्वाद भी मांगा
तो बेचारा नूँ बोल्या
खुश रहो, आबाद रहो
सदा ज़िन्दाबाद रहो
कराची या फैसलाबाद रहो
मन्नै बख्शो, आज़ाद रहो।

18 टिप्पणियाँ:

Udan Tashtari ने कहा…

हा हा!!बहुत मजेदार!!

NK Pandey ने कहा…

हा हा हा सचमुच मजेदार है।

मो सम कौन ? ने कहा…

उस्ताद जी,
धोक लगाती हाणा चुटकी काटेगी तो योही आसीरबाद पायेगी। फ़त्तू ने लीडर फ़िल्म का गाना भी गाया था, ’अपनी आजादी को हम ...’
जद आपने बात खोल ही दी तो हम क्यूंकर चुप रह जायें?
हा हा हा।

मो सम कौन ? ने कहा…

हम सिर्फ़ शुरूआत देखकर आगे का आईडिया लगा लेते हैं जी, फ़ से फ़त्त्तू बस्स।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

@मो सम कौन
...सर कटा सकते हैं ...
अब समझ में आया कि कुछ लोग मन्नै सर सर क्यों कहते हैं।

लो जी यो लाइन सेफ सै:
... सर झुका सकते हैं लेकिन नख कटा सकते नहीं ...

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

@Udan Tashtari
हाँ जी, दर्द तो हर मर्द को होता है …

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

@NK Pandey
इस ब्लॉग पर आपका स्वागत है!
"यत्र नार्यस्तु पूज्यंते" वाले देश में नारी पुरुष के पैर छूए, यह बात कुछ हज़म नहीं होती है।

P.N. Subramanian ने कहा…

"मन्नै बख्शो, आज़ाद रहो" हा हा, मजा आ गया.

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

@ P.N. Subramanian
सुब्रमण्यन जी, धन्यवाद!

NK Pandey ने कहा…

स्मार्ट इंडियन जी नारी के पैर तो पुरूष रोज ही छूता है प्रणाम करता है एक दिन वह भी छूले तो क्या हर्ज़ है...:)

गिरिजेश राव ने कहा…

फत्ते के पहले, दूसरे और तीसरे के बारे में बताइए।
और ईर वीर को क्यों भूल गए?

बेचारा फत्ते! शादी के बाद भी परेशाँ है।

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

एक तो ताऊ का रामप्यारे और दूजा यो फत्ते ब्लागिंग मैंह खूब झंडे गाडण लाग रे सैं :)

अभिषेक ओझा ने कहा…

:)

deepak saini ने कहा…

आपके ब्लाग की कविताये पढ कर मजा आ गया,
आज पहली बार आपकी शायरी पढी, बहुत देर हँसने के बाद
ये टिप्पणी लिखने बैठा हूँ
मो सम कौन का आभार जिनसे आपक पता मिला

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

दीपक जी आपका स्वागत है और मो सम कौन का आभार.

निर्मला कपिला ने कहा…

वाह वाह बहुत क्गूब फत्ते। शुभकामनायें।

मो सम कौन ? ने कहा…

@ गिरिजेश जी:
वस्ताद, गलती वर्तनी की तो नहीं है, लेकिन फ़िर भी अगर आपके कमेंट में ’भी’ की जगह ’ही’ कर दें तो कैसा रहे? हा हा हा

गिरिजेश राव ने कहा…

@ मो सम कौन

अनुराग जी - उस्ताद
मैं - वस्ताद

यह भेदभाव नहीं चलेगा। नहीं चलेगा।

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