रविवार, 20 जनवरी 2019

खस्ता शेर

हमने भी उसी कमबख्त से मोहब्बत की थी
जिसने खुद हमारी जान की सुपारी ली थी 🎶🎵🎼

- मुनीश शर्मा

बुधवार, 26 दिसंबर 2018

चश्मे बद्दूर (उर्फ़ दीदारे यार)

- उस्ताद चक्कू रामपुरी 'अहिंसक'


काश चश्मा तुम्हारा हिल जाये
और ये आँख हम से मिल जाये

प्यार में है बहुत कुछ कहने को
पास आने पे मुख क्यों सिल जाये

एक पल की सौगात है लेकिन
उम्र भर को हमारा दिल जाये

इक नज़र जो पड़े मुहब्बत से
दिल हमारा पल में खिल जाये

दिल नहीं खोलते किसी से अब
घाव फिर से कहीं न  छिल जाये

सोमवार, 9 अक्तूबर 2017

दोस्ती पर खस्ता दोहावली + राजनीति पर शेर

उस्ताद चक्कू रामपुरी 'अहिंसक'

अपनी अपनी दोस्ती, अपने अपने पीर
कोई हल्का रह गया कोई हुआ गम्भीर

जब तक हम चुप्पा रहे, दे गए चोट पे चोट
छिपके हम भी कट लिये न सहें खोट पे खोट

जो जो जिसके भाग में, पावै सो सो सोय 
चेरो आगे बढ़ गयो, क्यों गुर नाहक रोय

जब था फैलाना रायता तो धर दिया मिष्टी दही 
आप जैसे 'परग्रही*' अभियान में शामिल नहीं॥

खाट खड़ी तब जानिये, जब बंदा भू परि जाय
खीर पकी तब जानिये जब मुँह मीठा हो जाय

हमको पका सकें जो, वे हमें जोड़ते नहीं 
जो बच गये भोले, उन्हें हम छोड़ते नहीं

लिंक मांगकर खुश किये लिंक विज़िट करी नाहिं
रहिमन ऐसे मित्र को, कभी ब्लॉग दिखावत नाहिं

अब एक शेर दिल्ली शहर के राष्ट्रसंघ सम्राट के सम्मान में
खाँसियों का बड़ा सहारा है,
फाँसियों ने तो सिर्फ़ मारा है


*परग्रही = एलियन

मंगलवार, 21 मार्च 2017

खस्ता ग़ज़ल (३+२=५)

कटे किनारे कई भँवर मझधार मिले।  
पानी में सब डूबते भँइसवार मिले॥ (गिरिजेश राव)

घर तो छूटा ही बस्ती भी छूट गई, 
लवमैरिज में ऐसे रिश्तेदार मिले। (अनुराग शर्मा)   

बना स्कीम भागा कन्हैया फाँसी से,  
खुदकुशी पोस्टपोन बाहर इनार मिले। (गिरिजेश राव) 

रहम की मांग रहा था भीख जिनसे वो, 
हाकिम सभी जालिम व अनुदार मिले। (अनुराग शर्मा) 

चलता रहा आँख मीचे ऊँट क्षितिज तक,  
साँझ खोली पहाड़ों के अन्हार मिले। (गिरिजेश राव)  

गुरुवार, 31 दिसंबर 2015

प्रेम गिलहरी दिल अखरोट


खस्ता शेर के सभी पाठकों को नववर्ष 2016 के आगमन पर हार्दिक मंगलकामनाएं!

युवा कवयित्री बाबुशा कोहली की पंक्ति "प्रेम गिलहरी दिल अखरोट" को विस्तार दिया अनुराग शर्मा ने

प्रेम गिलहरी दिल अखरोट
प्रेम लतीफा दिल लोटपोट

प्रेम इलेक्शन दिल का वोट
प्रेम गांधी तो दिल है नोट

प्रेम का कर्जा दिल प्रोनोट
प्रेम मथानी दिल को घोट

प्रेम TNT दिल विस्फोट
प्रेम के पत्थर दिल की चोट

प्रेम प्यास दिल सूखे होट
प्रेमी थीसिस दिल फुटनोट

~ चक्कू रामपुरी "अहिंसक"

गुरुवार, 3 दिसंबर 2015

फेसबुकी शायरी

खुदा करे के मुहब्बत में वो मुकाम आये 
ब्लॉककर्ता क्षमा मांगने हमारे धाम आये 
फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजे और तुरत ये पयाम पाये
This person can't accept new friend requests, has reached maximum limit

एक फेसबुकी पैरोडी
अश'आर मेरे यूं तो ब्लॉगियाने के लिए हैं 
 कुछ शेर फेसबुक पर टिपियाने के लिए हैं

फेसबुकी टिप्पणी पर दाग़ की याद
किस क़दर उनको फिराक़-ए-ग़ैर का अफसोस है 
हाथ मलते-मलते सब रंग-ए-हिना जाता रहा (~ दाग़) 
हल्के से कहने से अपनी बात ही हल्की हुई 
फ़ेसबुक की टिप्पणी, सारा मज़ा जाता रहा (~ राग)


अब अपनी चार लाइना चचा गालिब की ज़मीन पर
मैं मर गया तो क्या हुआ बनी रहे ये दुश्मनी 
मेरी कबर पे फातेहा, आ के कोई पढ़ाये क्यूँ। 


और अंत में प्रेमकाव्य
वो मिटियॉर सी गुज़रती हैं 
दिल ये तारे सा टूट जाता है 

 ~ चक्कू रामपुरी "अहिंसक"

सोमवार, 13 अप्रैल 2015

चंद रामपुरी अश'आर चक्कू वाले

घूमते हैं लय के पहिये, मजबूत है तुक की धुरी
धुल गए सुर्मा बरेलवी, चलते हैं चक्कू रामपुरी

बात कितनी भी खरी हो धार ही बस खास है
कट्टे दुनाली किसे चहिए रामपुरी जो पास है

जिस तरें उस्तरे से हजामत है
चक्कू रामपुरी से,  क़यामत है

ओखल में सर देते हैं और मूसल देख के हँसते हैं 
ऐसे तुर्रमखाँ भी चक्कू रामपुरी को देखके डरते हैं

                            ~ चक्कू रामपुरी "अहिंसक"