शुक्रवार, 19 अप्रैल 2013

फ़्रेंड - फेसबुकी कुंडली

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सारा दिन जो ज्ञान को बाँट रहे थे फ़्रेंड
हमने थोड़ा लौटाया तो यारी का दी एंड

यारी का दी एंड मिटाया नाम हमारा
हाथ झाड़ के हमसे उन्ने किया किनारा

किया किनारा चैन बड़ा है उनके बिन
खाली-पीली वाल पोतते थे सारा दिन

[वैधानिक सूचना: फेसबुक शब्द पर ख़स्ता शेर का कोई कॉपीराइट नहीं है।]

10 टिप्पणियाँ:

तुषार राज रस्तोगी ने कहा…

अरे साब ऐसों के लिए क्या दिन ख़राब करना ....

किस किस को देखिये, किस किस को रोइए
आराम बड़ी चीज़ है, मुंह ढक के सोइए

बढ़िया कुंडली | आभार

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Tamasha-E-Zindagi
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काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

:-)

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहा दी होगी ज़रूर उल्टी ज्ञान धारा
इसी लिए उड़ेल दिया अपना रोष सारा । :):)

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

:)

वाणी गीत ने कहा…

शांति मिली :)

संतोष त्रिवेदी ने कहा…

..ऐसा हमरे साथ भी हुआ है !!

ब्लॉ.ललित शर्मा ने कहा…

हा हा हा बहुत बढिया शेर हैं

अनूप शुक्ल ने कहा…

:)

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

:)

कविता रावत ने कहा…

चलिय आखिर कितना भी घूम फिर लो ..बाते बना लो लेकिन आखिर सुकून अपने घर में ही मिलता है ...बहुत खूब ...

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