रविवार, 28 नवंबर 2010

अभी तो मैं जवान हूँ ...

हिन्दी ब्लॉग जगत के चिर-युवा सतीश जी ने "जब हम जवान थे" का राग छेडा तो हमें ख्याल आया कि अगर यह शिकवा अगर खस्ता होता तो कैसा होता:

देखती थीं आंखें सब
सुनते साफ कान थे
हाथ पांव कसरती
कभी तो हम जवान थे

घिस रहे हैं गाल हम
कस रहे है चाल हम
वृद्ध न कहना हमें
रंग रहे हैं बाल हम

महफिलों की शान हैं
गामा पहलवान हैं
वृद्ध न कहना हमें
अभी तो हम जवान हैं|
.

15 टिप्पणियाँ:

Kajal Kumar ने कहा…

जवान रहना बहुत ज़रूरी है :)

सतीश सक्सेना ने कहा…

यह बढ़िया रही ....जरा लेवल देखिये इस खस्ता शेर के
जवान बुढ़ापा , वृद्ध शेर सतीश सक्सेना ....
:-(...हे भगवान् ब्लागर दोस्त खस्ता करा के ही मानेंगे !
धन्यवाद अनुराग भाई आनंद आ गया ! आपकी कलम उठी तो अच्छा लगा !
शुभकामनाएं !

Arvind Mishra ने कहा…

जी अनुराग भाई अभी तो हम वाकई जवान हैं -सब पैरामीटर दुरुस्त ,मशीने काम करती हैं!
जिसे शक हो जांच कर सकता है -खुला आमंत्रण !

Kunwar Kusumesh ने कहा…

ये भी ठीक कहा आपने

deepak saini ने कहा…

अभी तो मै भी जवान हूँ

P.N. Subramanian ने कहा…

सतीश भाई को समर्पित यह रचना तो बड़ी बेहतरीन बन पड़ी है. आभार.

ajit gupta ने कहा…

अभी तो अस्‍सी पार हुए हैं
बोली भी दमदार है
अभी तो हम जवान हैं।
जवानी की कोई आयु नहीं होती है। हा हा हा हा।

सतीश सक्सेना ने कहा…

ओवरहालिंग के बावजूद भाई लोग अपने को नया मॉडल ही मानते हैं !
:-)

डॉ. नूतन - नीति ने कहा…

अनुराग जी.. खस्ता करार कर दिया आप की कविता ने.. सुन्दर

उपेन्द्र ने कहा…

वाह जी, मन तो जवान है तभी तो इतनी जवान कविता निकली.

प्रेम सरोवर ने कहा…

Bhai saheb, aapka post bahut achha laga.Meri aapni manyta hai ki har insan ke dil mein LAG honi chahiye.Agar dil mein lag hai to Budha bhi javan hai nahi to lag ke abhav mein aadmi javan ho kar bhi Budha ho jata hai.Good Post. Forget me not.

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

जब तक मन जवान है ,सब कुछ जववन रहता है ,और मन तो कभी बूढ़ा होता ही नहीं !
-ज्ञानचंद मर्मज्ञ

Anjana (Gudia) ने कहा…

:-)

POOJA... ने कहा…

:))))
waah... waah...
maza aa gaya padh kar... aur labels???

वर्षा ने कहा…

बुढ़ापा कितना डराता है न...

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