मंगलवार, 12 जून 2012

चक्कू रामपुरी "अहिंसक" के सर्वश्रेष्ठ खस्ता दोहे

(चित्र व दोहे: अनुराग शर्मा)


तुकमारिया खायें, खस्ता शेर बनायें, पुरस्कार पायें
बे बाँटैं तौ रेवड़ी, हम कर दें तौ खून
बे तौ मालामाल हैं, हम तरसैं दो जून

आइस पाइस टीप के, बने टिप्पणी वीर
दाने पाँच न बो सकैं, फिर भी खाबैं खीर

छुरी बगल मैं दाब के, झूठा कर गुनगान
ईटा सर पे मारता, मुख पर है मुस्कान

सच्चा सेवक बन रहा, रहा झूठ की खान
रेवड़ी बोतल बाँट के,  बन जइहै परधान

भालो उसको देख कै, सरक लये हैं लोग
भोले पर जा बरसते, है कैसो जा संजोग

बिल्ली उसको जानिये, मन में जो मुस्काय
छिप-छिप पंजा मार के, माल मलाई खाय

ऊँचा भया तौ का भया, ज्यूँ टावर मोबाइल
सिगनल इतना वीक है, कछहुँ नहीं सुनाइल






26 टिप्पणियाँ:

Archana ने कहा…

टिप रहे सकुचाय के टिपमारिया उस्ताद
छ्टवाँ दोहा पढि़ के रहे न बिन दिये दाद...:-))

संतोष त्रिवेदी ने कहा…

खस्ता शेर सुना दिए ,बड़े दिनों के बाद,
अब नीके दिन आइहैं,लेकर 'उनको' साथ!

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

☺☺☺

रचना ने कहा…

पुरूस्कार आवत देख कर
ब्लोगर करे पुकार
अच्छे अच्छे चुन लिये
कल हमारी बार

रचना ने कहा…

ब्लॉग खोजने मै चला
ब्लोग्गर ना मिल्या क़ोई
जो ब्लॉग खोजा आपना
मुझ से अच्छा ना क़ोई

Udan Tashtari ने कहा…

रेवड़ी बोतल बाँट के, बन जइहै परधान...ऐसे ही आजकल परधान बना जाता है महाराज....और भी कोई तरीका है क्या..??

दीपक बाबा ने कहा…

वाह वाह

हर शेर दाद मांग रहा है...

और रचना जी की टीप भी सेर पर सवा सेर वाली.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

:):) बहुत बढ़िया

Er. Shilpa Mehta ने कहा…

:) :) :) vaah - vah vaah, :)

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 14-06-2012 को यहाँ भी है

.... आज की नयी पुरानी हलचल में .... ये धुआँ सा कहाँ से उठता है .

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

शेर माँगते दाद हैं ,बुद्धि माँगती खाद,
दौड़ मची है हर तरफ़ ,अपना कहां निभाव !

Trupti Indraneel ने कहा…

bahut khub !

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत खूब !

सदा ने कहा…

वाह ... बहुत खूब।

कुश्वंश ने कहा…

छुरी बगल मैं दाब के, झूठा कर गुनगान
ईटा सर पे मारता, मुख पर है मुस्कान

वाह

दिगम्बर नासवा ने कहा…

खस्ता शेर ... मस्त शेर ...
मज़ा आ गया ...

veerubhai ने कहा…

आधुनिक भाव बोध प्रबोधन और व्यंग्य विनोद उद्बोधन के दोहे .

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

दोहे सब कुछ दूहते, खस्ता करते हाल.....:)))

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

बहुत मज़ेदार !

सादर

संजय @ मो सम कौन ? ने कहा…

ओमपुरिया फोर्मूला अपनाईये :)

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

गज़ब!

Mired Mirage ने कहा…

वाह, वाह. आखिरी वाला बहुत जमा.
घुघूतीबासूती

Dr.NISHA MAHARANA ने कहा…

waah......

निर्मला कपिला ने कहा…

छुरी बगल मैं दाब के, झूठा कर गुनगान
ईटा सर पे मारता, मुख पर है मुस्कान

सच्चा सेवक बन रहा, रहा झूठ की खान
रेवड़ी बोतल बाँट के, बन जइहै परधान


बिल्ली उसको जानिये, मन में जो मुस्काय
छिप-छिप पंजा मार के, माल मलाई खाय
हर एक दोहा लाजवाब।

expression ने कहा…

बहुत बढ़िया................
:-)
लाजवाब दोहे...
जाने कैसे इस ब्लॉग पर पहले आना नहीं हुआ...

सादर
अनु

सतीश सक्सेना ने कहा…

यह खस्ता शेर तो नहीं अनुराग भाई ....
राजीव तनेजा की शायरी पर उनको भेंट किया गया एक खस्ता शेर आपको पेश कर रहा हूँ ...

शेर मारू बड़े लिखने लगे हो,संभल के रहना
मोहल्ले में टमाटर की जमाखोरी के चर्चे है !

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