सोमवार, 13 अप्रैल 2015

चंद रामपुरी अश'आर चक्कू वाले

घूमते हैं लय के पहिये, मजबूत है तुक की धुरी
धुल गए सुर्मा बरेलवी, चलते हैं चक्कू रामपुरी

बात कितनी भी खरी हो धार ही बस खास है
कट्टे दुनाली किसे चहिए रामपुरी जो पास है

जिस तरें उस्तरे से हजामत है
चक्कू रामपुरी से,  क़यामत है

ओखल में सर देते हैं और मूसल देख के हँसते हैं 
ऐसे तुर्रमखाँ भी चक्कू रामपुरी को देखके डरते हैं

                            ~ चक्कू रामपुरी "अहिंसक"

1 टिप्पणियाँ:

Gaddar Shayar ने कहा…

बात ही अलग है चक्कु रामपुरी की

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