गुरुवार, 14 अक्तूबर 2010

ईर, वीर, फत्ते का झगड़ा

ईर कहेन वीर से चलो झगड़ा कर आईं ,
वीर कहेन फत्ते से चलो झगड़ा कर आईं, 
फत्ते पूछे - केसे कर आईं? काहें कर आईं?

ईर दिए एक लाफा,
वीर दिए दुइ लाफा, 
फत्ते बस गाल सहलाते रहे। 

झगड़ा गड़ा गया। 

7 टिप्पणियाँ:

गिरिजेश राव, Girijesh Rao ने कहा…

लाफा माने झापड़

सतीश पंचम ने कहा…

ये लाफा माने झापड़ बताना जरूरी था क्या ?

:)

Abhishek Ojha ने कहा…

फत्ते से कौनो दुश्मनी है का?

Arvind Mishra ने कहा…

अच्छा लाफा माने झापड़ हम तो बिना जाने समझे ही दुई लाफा एक ठौर दे आये हैं

ashokbajajcg.com ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति .

श्री दुर्गाष्टमी की बधाई !!!

Anu Singh Choudhary ने कहा…

फत्ते भी एक दुई ठो ढिशुम जमा आई हैं। :)

Smart Indian ने कहा…

मत कहो आकाश में कोहरा घना है
ये किसी की व्यक्तिगत आलोचना है (दुष्यंत कुमार?)

संयोग से यह व्यंग्य तो बुखारा (bucharest romania) से आये मौलाना द्वारा लखनऊ के मुस्लिम पत्रकार पर की गयी बदतमीज़ी पर खरा उतरता है।

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