गुरुवार, 22 सितंबर 2011

कलियुग का सत्य

(अनुराग शर्मा)

जिसकी जैसी खाज भैया
वैसा करो इलाज भैया

बत्तीस रुपै गरीबी के हैं
उन्नत हुआ समाज भैया

रज़िया फ़ंस गयी गुन्डों में
मूल बचा न ब्याज भैया

दुश्शासन से आस लगाई
कैसे बचती लाज भैय्या

शूर्पणखा के शासन में तौ
आय चुका रामराज भैया

5 टिप्पणियाँ:

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

मस्त खस्ता शेर..चाय का स्वाद बढ़ गया।

संजय @ मो सम कौन ? ने कहा…

सच्ची बात से कन्नी काटे,
सच कर देता नाराज भैया।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बत्तीस रुपै गरीबी के हैं
उन्नत हुआ समाज भैया

सटीक ..

सुज्ञ ने कहा…

बड़ी सटीक कविता!!

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

कौन कहे आजाद हुए हम,
खतम हो गया "राज" रे भैया??
भूखा भूत समाज ने पाया,
और वही है आज रे भैया!

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